जिन गीतों से सार न उपजे – आनन्द प्रकाश माहेश्वरी, आईपीएस

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OFFICERS TIMES  ANAND P MAHESHWARI

जिस डाली पर नीड़ बने ना
उस पर जा कर रहना कैसा
जिन राहों पर मंज़िल ना हो
उन पर चलना-चलना कैसा

जो डग सागर को ना जाए
उस पथ पर बहती क्यों नदिया
जो धारा तट तक ना जाए
उससे क्यों टकराती नैया

जिन पुष्पों में रंग न उभरें
उनका खिलना है क्या खिलना
जिनको जीवन मर्म न दरसे
उनका जीना भी क्या जीना

जो पयोद बे-मौसम बरसे
उसमें नाच नाचना कैसा
जिन बोलों से भरम न टूटे
उनको रटना-रटना कैसा

जिन तारों से वाद्य न फूटें
उनको कसना-कसना कैसा
जिन गीतों से सार न उपजे
उनको गाना, गाना कैसा

काव्य में खास पकड़ रखने वाले आनंद प्रकाश माहेश्वरी भारतीय पुलिस सेवा के 1984 बैच के अधिकारी हैं। राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले माहेश्वरी की स्कूली शिक्षा अजमेर, कोटा और जयपुर में हुई। दिल्ली के श्रीराम कॉलेज से स्नातक डिग्री लेने के बाद आर.ए. पोद्दार इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से प्रबंधन में डिग्री ली और पुलिस सेवाओं में आए। रचनात्मक लेखन में माहेश्वरी का देश में अच्छा नाम है। साम्प्रदायिकता जैसे संवेदनशील विषय पर माहेश्वरी की पहली पुस्तक कम्यूनलिज्म हैडल्ड विद ए डिफरेंस प्रकाशित हो चुकी है। इसके बाद उनकी बीसवीं सदी की बीस कहानियां पुस्तक खासी चर्चित हुई। कुछ पल विषाद के कुछ पल आनन्द के माहेश्वरी का पहला काव्य संग्रह है।

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