शुभा का संसार ‘फ्लाई ऑन द वॉल…’

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OFFICERS TIMES Shubha Sharma 1999 IASदेश की ब्यूरोक्रेसी में साहित्य से लगाव, शब्दों की ओर झुकाव और शब्द संसार में मोतियों से पिरोए भाव बेहद मायने रखते हैं। यही वजह है कि देश की ब्यूरोक्रेसी में ऐसे अधिकारियों का भी एक कारवां हैं, जो हमेशा इस शब्द संसार में गोते लगाना पसंद करता है, जिन्हें शब्दों से, साहित्य से गहरा लगाव है। शुभा शर्मा भी ऐसे ही आईएएस अधिकारियों में शामिल हैं।
‘फ्लाई ऑन द वॉल एण्ड अदर स्टोरीज’ 13 लघु कथाओं का संगम है। …या यूं कहें, इन्हीं से मिलकर बना है शुभा का संसार। शुभा की इस पुस्तक में जिन तेरह कहानियों को उन्होंने पिरोया है उनमें द फ्लाई ऑन द वॉल, फ्लैश एण्ड ब्लड, डिनर एट बुखारा, नो मैंस लैण्ड, द बुद्धा, ए चैनल एनकाउंटर, सनसैट सरप्राइज, द तबला रीफ्रेन, ह्यूमन(स्) मैटर, बिटर स्वीट, केस नंबर 33/08, रेन, द डेमोंस विदइन शामिल हैं। शुभा की इन कहानियों में जिंदगी के छह साल सिमटे हुए हैं। उन्होंने इन्हें 2007 से 2012 के बीच पिरोया है। वो कहती हैं, इनमें मेरे अपने भाव हैं, विचार है, जो बिना किसी पूर्व योजना के लिखे गए हैं। महिलाओं को केन्द्र में रखने वाली शुभा की इस चर्चित पुस्तक और महिलाओं के बारे में शुभा के विचार बेहद मजबूत हैं। वे मानती हैं कि महिलाएं बहुत से मामलों में, बहुत से मंचों पर पुरुषों से बहुत मजबूत और आगे हैं।
लखनऊ से पली-बढ़ी शुभा ने दिल्ली के श्रीराम कॉलेज से इतिहास में शिक्षा ली है। शुभा उड़ीसा काडर के जरिए भारतीय प्रशासनिक सेवाओं का (1999 बैच) हिस्सा बनीं और शुरू हुआ शुभा का नया संसार। जिसमें कर्तव्य भी आए, जिम्मेदारियां भी, परिवार और सामाजिक सरोकार भी। लेकिन शुभा निभाती चली गई। एक अनवरत सिलसिला बनाते हुए। शब्द संसार को समेटे हुए। मुंशी प्रेमचन्द और शरत चन्द्र चटोपाध्याय सरीखे कहानिकारों से प्रेरित शुभा अपनी पुस्तक को सच्चे शब्दों का संसार स्वीकार करती हैं। समाज के पक्ष-पहलुओं से जुड़ी शुभा की इस पुस्तक में शुभा के नजरिए, दुनिया को देखने के तरीके का गहरा असर है।