ग़ज़ल – रामकिशोर उपाध्याय

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OFFICERS TIMES  Ramkishore Upadhyay IRAS

बंदगी के सिवा ना हमें कुछ गंवारा हुआ
आदमी ही सदा आदमी का सहारा हुआ
*
बिक रहे है सभी क्या इमां क्या मुहब्बत यहाँ
किसे अपना कहे,रब तलक ना हमारा हुआ
*
अब हवा में नमी भी दिखाने लगी है असर
क्या किसी आँख के भीगने का इशारा हुआ
*
आ गए बेखुदी में कहाँ हम नही जानते
रह गई प्यास आधी नदी नीर खारा हुआ
*
शाख सारी हरी हो गई ,फूल खिलने लगे
यूँ लगा प्यार उनको किसी से दुबारा हुआ

(रचनाकार रामकिशोर उपाध्याय भारतीय रेलवे लेखा सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं। फिलहाल नई दिल्ली में उत्तर-मध्य रेलवे में उप मुख्य लेखाधिकारी एवं वित्त सलाहकार पद पर सेवाएं दे रहे हैं। मूलत: मेरठ के रहने वाले उपाध्याय काव्य पर गहरी पकड़ रखते हैं।ड्राईंगरूम के कोने उपाध्याय का चर्चित काव्य संग्रह है। उपाध्याय का ब्लॉग – www.meraavyakta.blogspot.com भी बेहद चर्चित है।