आई.ए.एस. अनुराग के मर्डर के पीछे करप्ट आई.ए.एस. ऑफिसर्स!

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बंगलुरु। यह बड़ा सवाल है! एक राज्य में इमानदार आई.ए.एस. ऑफिसर्स अपने ही सीनियर्स से खौफजदा हैं। खौफ भी इतना की इमानदारी की कीमत जान देकर चुका रहे हैं। बीते दिनों युवा आई.ए.एस. अनुराग तिवारी की मौत के बाद मर्डर होने के शक के चलते आईपीसी की धारा 302 में लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। लेकिन यह शक केवल परिवार और पुलिस तक ही सीमित नहीं है, आई.ए.एस. लॉबी का एक तब्का इस बात का मजबूत समर्थन कर रहा है कि अनुराग का मर्डर उसी के काडर के वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारियों द्वारा रची शाजिश का हिस्सा है।

लखनऊ के हजरतगंज इलाके के वीआईपी गैस्टहाउस के सामने 17 मई को 36 साल के युवा आई.ए.एस. अनुराग तिवारी की डैड बॉडी मिली थी। मामला गरमा गया, क्योंकि स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने जब तिवारी की मौत की जांच का खुलासा करने के लिए सुराग ढूंढने शुरू किए। यह उम्मीद तीन तीन बाद टूटी जब, स्पेशल टीम ने हाथ खड़े कर दिए और अनुराग के परिवार ने मामला सीबीआई को सौंप कर जांच करवाने की मांग कर डाली।

क्यों हुआ मर्डर?

अनुराग कर्नाटक काडर में बेहद इमानदार प्रदर्शन कर रहे थे। उनके हाथ करीब 2000 करोड़ का घोटाला लगा, जिसे जल्द एक्सपोज करने वाले थे। इस बात उत्तर प्रदेश के मंत्री सुरेश कुमार खन्ना विधानसभा में भी जगजाहिर कर चुके हैं। इधर कुछ ब्यूरोक्रेट्स का मजबूत दावा है कि अनुराग जिस घोटाले का खुलासा करने वाले थे उसमें वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी भी एक्सपोज होते। इस बात को स्थापित करते हुए कर्नाटक काडर के ही वरिष्ठ आई.ए.एस. के. मथाई भी कह चुके हैं कि अनुराग मर्डर एक सुनियोजित प्लानिंग का हिस्सा है। मथाई के अनुसार यहां काडर में आई.ए.एस. लॉबी में विशेष गैंग काम कर रही है, जो अधिकारियों की जान की परवाह तक नहीं करती। गौरतलब है कि मथाई खुद लोकायुक्त को वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारियों द्वारा प्रताडि़त करने को लेकर शिकायत दर्ज करवा चुके हैं। वे कहते है यहां प्रताडऩा इस स्तर की है कि या तो आप वीआरएस ले लो या मरो।

मर्डर की सीबीआई जांच हो सकती है प्रभावित
भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में अपने कामकाज को लेकर पहचाने गए सेवानिवृत्त अधिकारी एम.एन. विजयकुमार भी मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश को 22 मई को लिखित में दे चुके हैं कि अनुराग मामले में प्रभावित आई.ए.एस. गैंग इतनी प्रभावी है कि वह सीबीआई जांच को भी प्रभावित करने की ताकत रखती है। विजयकुमार के अनुसार यह करप्ट आई.ए.एस. ऑफिसर्स की गैग काडर में सब कुछ अपने नियंत्रण में लेकर चल रही है।

हम संतुष्ट नहीं हैं, मर्डर की सही जांच हो – मयंक
इधर अनुराग तिवारी के परिवार ने मर्डर को लेकर जांच से असंतुष्टि जाहिर की है। परिवार में अनुराग के बड़े भाई मयंक के अनुसार जांच सही होनी चाहिए। फिलहाल जांच प्रभावित हो रही है। फिलहाल हो रही जांच से हम असंतुष्ट हैं। इस संबंध में हमने मुख्यमंत्री से मुलाकात भी की है। अनुराग के पिता बी.एन. तिवारी के अनसार, मेरा बेटा इमानदार था और करप्ट ऑफिसर्स नहीं चाहते थे कि वह उन्हें और सिस्टम को एक्सपोज करे। अनुराग के मर्डर का राज खुलना जाहिए। जांच एजेंसियों को इमानदारी से जांच में सहयोग देना चाहिए।