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‘ख्वाब सजा दे कोई’ – रामकिशोर उपाध्याय

देकर शब्द जुबां को, उम्दा गजल बना दे कोई। फिर इन आंखों में जीने का ख्वाब सजा दे कोई।। ** इस समय हृदय मेरा यही कह रहा है, वो यहीं निकट द्वार पर मुझे सुन रहा है, जाकर उस निष्ठुर को मेरी पीर दिखा दे कोई। फिर इन आखों में जीने का ख्वाब सजा दे […]

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ओहदों को सलामी है – अश्विनी शर्मा, आरएएस

ये बात अवामी है ओहदों को सलामी है क्या दौर है गुलशन का फूलों की निलामी है। परवाज के शैदा की किस्मत में गुलामी है। तारीख में कुछ लिख लो ये वक्त हंगामी है। किरदार है बौनों का पर नाम तो नामी है। क्या जिक्र है मसले का तस्वीर इनामी है। अब ठीक भला क्या […]

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गीतिका – रामकिशोर उपाध्याय, आईआरएएस, उत्तर-मध्य रेलवे

मौन को मिल गयीं शब्द की डोलियाँ l बोलने लग गयीं आप ही पोथियाँ l * हार में जीत है जीत में हार है, तू सदा जीत ले प्रीत की बाजियां | * मीत की आँख में नीर की धार हो, पोंछ दे जानके पीर की ग्रंथियां | * तोड़ दे बंधनों की बेड़ियाँ तू […]

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बहुत मसरूफ फिर भी ठाले हैं- अश्विनी शर्मा, आरएएस

अब भी ऐसे कई जियाले हैं बहुत मसरूफ फिर भी ठाले हैं। वक्त तो आदतन ही बहता है एक लम्हा मगर संभाले हैं। सूप ये देखिये तो कैसा है हमने अहसास कुछ उबाले हैं। वो जो सूरज को फेंक आये हैं उनके हाथों में अब उजाले हैं। इन मुंडेरों पे जो फुदकते हैं ये कबूतर […]

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गुलाब – रामकिशोर उपाध्याय, आईआरएएस, उत्तर-मध्य रेलवे

बहुत प्रयास किया कि कुछ लिख दूं शब्द नहीं मिले… पुस्तकें देखी कुछ शब्द उठाये कुछ को बिछौना बनाया कुछ को तकिया कुछ चादर बनकर फैल गए फिर भी कुछ बचे रह गए यह सोचकर उन्हें उपयोग नहीं किया कि सुबह नाश्ते पर देखेंगे… ये बचे शब्द रोने लगे मैंने कहा रोओ मत… जाओ मुक्त […]

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कल्पना – रामकिशोर उपाध्याय, आईआरएएस, उत्तर-मध्य रेलवे

ये कल्पना… भी बड़ी अजीब होती है बेखौफ, बेलाग और बेहया ना समय देखती ना जगह देखती ना सामने कौन है ना दाएं कौन है बस आ जाती है बिन पैरों के बिन पंखों के और चलकर एक घरौंदा एक नीड के लिए एक बया की तरह बस बुनती रहती है समय को झंझावातों को […]

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आईएएस डॉ. किरण सोनी की पेंटिंग ‘थ्री जनरेशन’ जाएगी फ्रांस

राजस्थान काडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और काडर के क्रिएटिव ऑफिसर्स में हमेशा लीड करने वाली अधिकारी किरण डॉ. किरण सोनी गुप्ता की पेंटिंग ‘थ्री जनरेशन’ का प्रदर्शन फ्रांस में किया जाएगा। फ्रांस में विश्व के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित संग्रहालय लूव में आयोजित होने जा रही वार्षिक प्रदर्शनी के लिए इस पेंटिंग क चयन किया […]

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कहीं कोई दीप जल रहा है – रामकिशोर उपाध्याय, आईआरएएस, उत्तर-मध्य रेलवे

कहीं कोई दीप जल रहा है, कहीं कोई गीत रच रहा है (1) वो बन गए हैं चाहत मेरी, कोई नयी टीस भर रहा है (2) रच रही नूतन सृष्टि कुछ, कोई नयी प्रीत रच रहा है (3) मिट रहे अब विषाद चिन्ह, कोई नयी लीक गढ़ रहा है (4) रहा नहीं संशय विजय में, […]

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गजल – विश्वजीत ‘सपन’, आईपीएस, आंध्रप्रदेश

मैं तुझे दिल में बसाना चाहता  हूँ कू-ब-कू इक घर बनाना चाहता  हूँ तुम नहीं आओगे ऐसी बात होगी अपने दिल में बस सजाना चाहता  हूँ आइने पे देख हैसी आतिश लगी आग से अब दिल जलाना चाहता  हूँ आखिरी मौका मिला है खूब है वो वा कफस चिडिय़ा उड़ाना चाहता  हूँ ऐ सपन देखो किसी सैलाब को तुम रुख […]

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मैं स्त्री हूं – रामकिशोर उपाध्याय, आईआरएएस, उत्तर-मध्य रेलवे

जब मैं नहीं देखती तुम्हें तुम कोशिश करते हो कि मैं तुम्हें देखूं क्योंकि मैं स्त्री हूं… जब मैं नहीं मुस्कराती तुम चाहते हो कि मैं खिलखिलाकर हंस पडूं क्योंकि मैं स्त्री हूं… जब स्पर्श तक तुम्हारा मैं नहीं चाहती तुम चाहते हो कि मैं तुम्हारी सेज पर बिछ जाऊ क्योंकि मैं स्त्री हूं… जब […]

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