अब हुई दिनेश एम.एन. की असली वापसी

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जयपुर। कहते हैं,जिंदगी कई बार लौट कर वहीं ले जाती है, जहां से वह दर्द देती है। जख्मों पर मरहम वहीं लग पाता है। वर्ना न दुआ न दवा सब बेअसर हो जाते हैं। शोराबुद्दीन एनकाउंटर का सालों तक दंश झेलने वाले आई.पी.एस. दिनेश एम.एन. की सही मायने में वापसी शनिवार शाम से हुई है। राजस्थान के कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल के एनकाउंटर के साथ। घटनाएं लगभग एक जैसी हैं, किरदार भी। शोराबुद्दीन मामला राजनीतिक दबावों से गुजरा और शिकार हुए इमानदार पुलिस अधिकारी। आनंदपाल मामला भी बनते-बनते उलझता चला गया। राजस्थान की राजनीति में उबाल भरने वाला मामला बना, बिलकुल शोराबुद्दीन के गुजरात मामले की तरह।

शोराबुद्दीन मामले की तरह, बीते कुछ समय में राजस्थान में आनंदपाल का मामला चर्चा में आया। कई अधिकारी बदले। सबने तंत्र में अपने सोर्स का बखूबी इस्तेमाल करते हुए जांच की, लेकिन यह तिलक दिनेश एम.एन. के हाथों ही निकलना था। एक एनकाउंटर मामले में सिस्टम उनके खिलाफ हुआ, उन्हें जेल तक जाना पड़ा। बच्चों और परिवार को सालों तक उस सजा को भुगतना पड़ा जिसके न दिनेश दोषी थे, न उनका परिवार। लेकिन विधि का विधान देखिए, कभी पड़ोसी राज्य के एनकाउंटर मामले में उलझे दिनेश को विलेन बनाया गया था, आज फिर एक एनकाउंटर से वह स्टार हो गए हैं। राजस्थान की राजनीति में एक समय आनंदपाल का एनकाउंटर न केवल सरकार को राहत देने वाला है, बल्कि नागौर जैसे जिले में भीतर ही भीतर उबल रहे जातिगत द्वेष और बवाल को शांत करने वाला भी है। यह उबाल आने वाले चुनावों में सरकार को भारी पड़ सकता था। …लेकिन शायद आज रात दिनेश एम.एन. ठीक से सो पाएंगे। एक ऐसी नींद जिसका सालों से उन्हें इंतजार रहा होगा। सालों साल जब शोराबुद्दीन मामले में सजायाफ्ता दिनेश ने अपनी रातों की नींद को खुली आंखों और अंधेरे आसमां के बीच दफनाया होगा, उसे आज उखाड़ निकालने की ख्वाहिशें जरूर निकलेंगी। क्योंकि इमानदार अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव और दंश जो सवाल खड़े कर देते हैं, उनके लिए आनंदपाल एनकाउंटर दिनेश एम.एन. के हाथों होना, करारा थप्पड़ भी है। सही मायने में दिनेश एम.एन. अब एक भरी सांस को छोड़ते हुए अपनी असली वापसी का जश्न खुद ही खुद के साथ मना पाएंगे। खुद के साथ इसलिए, क्योंकि पुराने एनकाउंटर के बाद जिस तरह खुद से खुद की लड़ाई लड़ाते हुए उन्होंने अपने आप को आगे बढ़ाया और अब उभर कर लौटे हैं, पुलिस महकमे में हमेशा याद किया जाएगा।

– प्रवीण जाखड़