आई.ए.एस. के प्रयासों से आंगनबाड़ी केन्द्रों में मस्ती की पाठशाला

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जयपुर। एक नवाचार पूरे महकमे की तस्वीर बदल सकता है। पुराने ढर्रे को तोड़ कर उमंगों को नई उड़ान देने की ताकत रखता है। सरकारी मशीनरी के बेहतर इस्तेमाल और मानव संसाधन का उचित उपयोग करके क्रांतिकरी बदलाव ला सकता है। ऐसा ही नवाचार राजस्थान में शुरू हुआ है, जिसे देशभर में पायलट प्रोजेक्ट बना दिया जाए, तो शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कामयाबी को छुआ जा सकता है।

राजस्थान काडर के बहुचर्चित युवा आई.ए.एस. डॉ. समित शर्मा ने इस बार जड़ों तक असर डालने का नवाचार लागू करके क्रांतिकारी बदलाव की आहट पैदा कर दी है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग में सेवाएं दे रहे डॉ. समित शर्मा ने प्रदेश के 61000 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर सरकार की ओर से प्री-स्कूल योजना को अमलीजामा पहना दिया है। इस योजना को लागू कर दिया गया है और अब तीन से छह वर्ष के बच्चों को 61 हजार आंगनबाड़ी के केन्द्रों पर मस्ती-मस्ती में पढ़ाया जाएगा। इन बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए इस योजनांतर्गत खास पुस्तकें तैयार की गई हैं, जिनसे मजे-मजे में पढ़ाई करवाई जाएगी।

कैसी है मस्ती की पाठशाला ?
प्रदेश के सभी 61000 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर तीन चरण में बच्चे मस्ती भी करेंगे और पढ़ेंगे भी। तीन से चार वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए डॉ. समित ने किलकारी, चार से पांच वर्ष के बच्चों के लिए उमंग और पांच से छह वर्ष के बच्चों के लिए तरंग वर्ग बुक से शिक्षा देने की योजना को अमलीजामा पहनाया है। इनके जरिए आंगनबाड़ी केन्द्रों को जीवंत प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा केन्द्र बनाया जाएगा। इससे खेल-खेल में बच्चों के बौद्धिक विकास में मदद मिलेगी। साथ ही योजनांतर्गत जिला कलक्टर व जिला परिषद सीईओ मस्ती की पाठशाला में जाएंगे भी पढ़ाएंगे भी।

सोच बदलेगी
अब तक प्री-स्कूल कंसेप्ट केवल निजी स्तर पर ही मशहूर है। देशभर में प्री-स्कूल मेट्रो, टू टीयर और थ्री टीयर शहरों में चर्चा में आए हैं। ग्रामीण शहरों में इस कंसेप्ट से अब तक दूरी ही रही है। प्री-स्कूल में बच्चों को रोचक पुस्तकों, चित्रांकन, खिलौनों इत्यादि पढ़ाई करवाते हुए, शिक्षा से जोड़ा जाता है। ठीक उसी तर्ज पर इस योजनांर्गत ग्रामीण क्षेत्रों तक के बच्चों के लिए बड़ी पहल होगी। इससे बच्चों ही नहीं, माता-पिता की सोच तक में बदलाव का असर दिखाई देगा।

क्या होंगे दूरगामी असर
योजना से शिक्षा का स्तर सुधरेगा। नामांकन बढ़ेगा। शिक्षा विभाग जिस स्तर के लिए प्रयासरत है, उसकी जड़ों तक तरंग पैदा करने वाली यह योजना बच्चों में एकदम शुरुआती दिनों से पढ़ाई के प्रति लगाव पैदा करेगी। इससे बच्चे जब तक स्कूलों में पहुंचेंगे उनमें अक्षर ज्ञान, पढऩे की आदत, पढ़ाई से लगाव जैसी क्रियाओं से जुड़ाव पहले ही होगा। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ भावी पीढ़ी के उन बच्चों को बड़े स्तर पर होगा जो ग्रामीण इलाकों से, पिछड़े इलाकों से हैं, लेकिन गुणवत्तपूर्ण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। उन्हें बेहतर पुस्तकें, क्रिएटिव सामग्री मिल पाएगी। फिलहाल जहां सरकारी स्कूलों में पांचवी से आठवी तक के बच्चों को भी अंग्रेजी जैसे विषयों में पुस्तकें तक पढऩी नहीं आती, इस योजना के असर में उनमें भी बदलाव और सुधार आएगा। जनप्रतिनिधियों को भी इन स्कूलों से जोड़ा गया है। इससे प्रशासन, जनप्रतिनिधि, बच्चों के माता-पिता और बच्चे सभी एक लूप में आएंगे।