IAS ने खोला राज, डेलीगेट्स को नहीं परोसी थी बिरयानी, तुरंत मिले ट्रांसफर ऑर्डर

0
938

जम्मू-कश्मीर। सिस्टम की आवभगत, नेताओं की चमचागिरी और सरकार में बड़े पदों पर बैठे भ्रष्टों को मस्करा नहीं लगाना आई.ए.एस. तक को भारी पड़ जाता है। यह राज खोला है जम्मू-कश्मीर काडर की पहली आई.ए.एस. अधिकारी ने अपनी किताब में। काडर में 1979 से सेवाओं में आकर 37 सालों तक समर्पित सेवाएं देने वाली सोनाली कुमार ने की हाल ही जारी हुई पुस्तक Unmasking Kashmir: A Bureaucrat Reveals चर्चा में आ गई है। इस पुस्तक में सोनाली ने सेवाओं के दौरान एक अधिकारी की नजर से जो देखा, उसे लिखा है।

पुस्तक प्रकाशक Manhas Publications के अनुसार यह पुस्तक एक ब्यूरोक्रेट की नजर से कश्मीर को देखने का गहरा अनुभव है। पुस्तक में कश्मीर समस्या को अधिकारी की नजर से देखना, समाधान तलाशना जैसे अनुभव हैं। कुल मिलाकर 37 सालों के अनुभव और राज का संकलन है यह पुस्तक। इसी पुस्तक में सोनाली ने अनुभव शेयर करते हुए लिखा है, ‘मैं नई दिल्ली स्थित जम्मू-कश्मीर भवन में प्रिंसिपल रेजिडेंट कमीशनर थी। एक डेलीगेशन आया हुआ था। जिसे बिरयानी नहीं परोसी, तो तुरंत मुझे ट्रांसफर ऑर्डर थमा दिए गए थे।’

सोनाली के पति अरुण कुमार खुद 1979 बैच के अधिकारी रहे हैं। अरुण 2008 में कश्मीर में उपजे अमरनाथ विवाद के दौरान श्री अमरनाथ बोर्ड के सीईओ थे। कश्मीर लगभग दो हिस्सों में बंटने को तैयार था। इस अनुभव को भी पुस्तक में बांटा गया है। पुस्तक में मुख्य सचिव द्वारा हुर्ररियत की मीटिंग को होस्ट करने जैसे राज भी खोले गए हैं। प्रधानमंत्री की बेटी को जम्मू-कश्मीर में शॉपिंग करवाने का मामला हो या आई.ए.एस. ऑफिसर को सी.बी.आई. द्वारा अरेट करने का मामला सोनाली ने पुस्तक में बहुत कुछ खुलकर लिखा है। सीधे तौर पर यह पुस्तक कश्मीर की ब्यूरोक्रेसी में बीते साढ़े तीन दशक का आईना बनकर सामने आई है, जिससे सिस्टम में बैठे और कथित पावरफुल टॉपशॉट्स को समस्या होने वाली है।