IAS ने विभाग में दौड़ाया करंट, सिस्टम भी हैरान !

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कानपुर। देश में ऐसे युवा ऑफिसर्स की कमी नहीं है, जो राष्ट्रहित में अपनी नीतियों से विकास को जोडऩे में कामयाब हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में युवा आई.ए.एस. रितु माहेश्वरी भी ऐसे ही युवाओं की फेहरिस्त में एक चमकता सितारा बन गई हैं। 2011 में कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी में उन्हें सेवाओं के लिए नियुक्ति दी गई। बिजली कंपनी में घाटा, छीजत और चोरी पकडऩे में नाकामी ने विभाग को दबाव में ला रखा था। रितु ने सारा माजरा समझा और शुरू कर दिए प्रयास।

जब रितु ने काम संभाला उत्तर प्रदेश के 99 प्रतिशत गांवों में बिजली थी, लेकिन उपभोग के लिहाज से केवल 60 प्रतिशत जनता ही अपने घरों में इसका उपयोग कर पा रही थी। त्वरित समाधान शुरू किए गए। छीजत और चोरी के उपाय किए गए। तुरंत नए मीटर लगाए गए, जो बिजली चोरी को मॉनिटर करने में सक्षम थे। करीब एक तिहाई ग्राहकों के नए मीटर बदले गए। यह नए मीटर चोरी तो पकड़ते ही थे, साथ ही कहां-कहां लीकेज होती थी उसे भी मॉनिटर करते थे। इससे तुरंत विभाग को घाटा 30 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत लाने में मदद मिल गई। यह अपने आप में क्रांतिकारी कदम साबित हुआ और 15 फीसदी का फायदा अब तक का रिकॉर्ड चोरी रोकथाम से होने वाला फायदा था। ग्रामीण इलाकों में औसतन यह प्रतिशत 25-30 को छू गया और सीधे तौर पर विभाग को आंकड़ों में करीब 1.85 करोड़ का तुरंत लाभ हुआ।

सिस्टम ने विरोध किया, पब्लिक से विरोध की आवाजें उठी। लेकिन रितु माहेश्वरी नहीं रुकी। उन पर राजनीतिक दबाव बनाए गए और फंसाने के प्रयास भी किए गए। रितु ने सिलसिला जारी रखा। उनकी कामयाबी को नरेन्द्र मोदी के ऊर्जा विकास कार्यक्रमों से तो जोड़ा ही गया, साथ ही 2014 में बॉलीवुड में फिल्म कतियाबाज भी बनी। अब भविष्य में दिसंबर 2019 तक शेष 15 प्रतिशत घाटे से बाहर निकालने के लिए रितु जुटी हुई हैं। यहां काडर में उनके लगाए इस करंट का असर साफ नजर आता है। लेकिन कहीं दबी जुबां, तो कहीं खुलकर रितु की तारीफों और कामकाज की प्रणाली के पुल जरूर बांधे जा रहे हैं।