नीरज पवन सहित 10 आई.ए.एस. नहीं दे रहे प्रॉपर्टी का ब्योरा

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जयपुर। ऑफिसर्स की बढ़ती अप्रत्याशित संपत्तियों ने लॉबी को दो फाड़ कर दिया है। एक ओर इमानदार अधिकारी सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं तेजी से संपत्तियां बना रहे अधिकारी सवालों में बीच-बचाव की कवायद का हिस्सा बन रहे हैं। राजस्थान काडर के ताजा मामले में दो अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारियों (इंदू भूषण और पी.के.सिंह)के बीच संपत्तियों के ब्योरे को लेकर आमना-सामना हुआ है, वहीं आई.ए.एस. अधिकारियों में जिन अधिकारियों ने इस साल संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है, उनको लेकर भी लॉबी में सुगबुगाहट तेज हो गई है।

राजस्थान काडर में फिलहाल 10 अधिकारी ऐसे हैं, जिन्होंने 2017 जनवरी में दिए जाने वाले अचल संपत्ति के ब्योरे को अभी तक भारत सरकार के हवाले नहीं किया है। मुख्य सचिव सहित लगभग ज्यादातर अधिकारियों ने अपनी अचल संपत्तियों को परफोर्में में भरकर जनवरी महीने में ही सरकार को सौंप दिया था, लेकिन 10 अधिकारियों ने केन्द्र के सख्त निर्देर्शों और प्रधानमंत्री मोदी के संपत्ति के ब्योरों को सार्वजनिक करने के बयानों के बावजूद ये अधिकारी मामले को लेकर गंभीरता नहीं बरत रहे हैं। इन अधिकारियों में 1980 बैच के अशोक शेखर, 1984 बैच की रश्मि प्रियदर्शनी, 2002 बैच के पूसा राम पंडत, 2003 बैच के जगदीश चंद पुरोहित, 2003 बैच के नीरज के. पवन, 2006 बैच के वी.एस. कुमार, 2011 बैच के एन.एस.पी. मदान और शिवांगी स्वर्णकार, 2012 बैच के विक्रम जिंदल तथा 2013 बैच के जी.पी. केशवराव शामिल हैं।

दिलचस्प मामला यह भी है कि केन्द्र सरकार के गंभीरता बरतने के बावजूद इस मामले में देशभर में इस वर्ष 271 आई.ए.एस. अधिकारियों ने अब तक अपन अचल संपत्तियों का ब्योरा देना उचित नहीं समझा है। अब देखना यह है कि छोटे से छोटे नियमों में शासन अपने दम का दावा पेश कर देता है, वहीं देश की शीर्ष सेवा के अधिकारियों द्वारा सरकारी आदेशों की खिल्लियां उड़ाने के बावजूद सरकार इनके खिलाफ क्या कदम उठाती है।

– प्रवीण जाखड़

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