‘इनाम नहीं, निष्पक्षता चाहिए’ – IPS डी. रूपा

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देश की सख्त और दबंग महिला आई.पी.एस. अधिकारियों में से एक डी.रूपा न डरती हैं, न डिगती हैं। हालात कैसे भी हों। राजनीतिक प्रभावनाओं से दूर, ईमानदारी और साफगोई के लिए मशहूर रूपा एक बार फिर आई.पी.एस. सहित ऑफिसर्स लॉबी की सुखिर्यों में हैं।

बढ़ते करप्शन और राजनीतिक, वाणिज्यिक खेमेबंदी ने अधिकारियों की घेरेबंदी कर रखी है। देश के हर प्रदेश में ऐसी खबरें रोज सुर्खियां बनती हैं। हर रोज कहीं न कहीं, किसी अधिकारी को भ्रष्टाचार के दलदल में धकेलने के प्रयास बदस्तूर जारी हैं। लेकिन इन सुर्खियों के बीच अपने कर्तव्यों, निष्ठा और निष्पक्षता को ढाल बनाकर खुद को बचाए रखने वाले बिरले अधिकारी भी हैं। ताजा बानगी है आईजी (होमगार्ड एवं सिविल डिफेंस), बंगलुरू डी. रूपा। रूपा का डर तो सिस्टम में भष्टों को पहले भी डराता रहा है, लेकिन इस बार रूपा ने जो किया वह केवल आई.पी.एस. लॉबी के लिए ही नहीं, बल्कि देश के ऑफिसर्स को गौरवांवित करने वाला भी है।

बंगलुरू के नम्मा बंगलुरू फाउंडेशन की ओर से नौंवे सम्मान समारोह के लिए आई.पी.एस. डी. रूपा को चुना गया था। इस सम्मान में रूपा को दो लाख रुपए मिलने थे। बंगलुरू का यह गैर सरकारी संस्थान द्वारा विभिन्न श्रेणियों में अवॉर्ड देता आया है। लेकिन जैसे ही रूपा को इस बात की जानकारी लगी कि यह एनजीओ भाजपा के सांसद राजीव चंद्रशेखर द्वारा वित्त पोषित है, उन्होंने इस अवॉर्ड के लिए लिखित में असहमति जताकर इसे अस्वीकार कर दिया। रूपा के इस पत्र की जानकारी सार्वजनिक होते ही हड़कंप मच गया। राजनीतिक गलियारों सहित अफसरशाही में रूपा के इस कदम को लेकर चर्चे खास हो गए। रूपा के इस कदम के बाद अब एनजीओ की ओर से लगातार सफाई पेश की जा रही है, लेकिन दूसरी ओर देशभर में रूपा के इस जज्बे की भरपूर सराहना हो रही है। वहीं रूपा ने सरलता से अपनी बात रखते हुए कहा कि, ‘सरकारी कर्मचारी से अपेक्षा की जाती है कि वह अर्ध-राजनीतिक और संघों जिनका थोड़ा सा भी राजनीतिक ताल्लुक है उनसे दूरी बनाए रखते हुए उनके प्रति तटस्थ रहे। केवल तभी लोक सेवक लोगों की नजरों में अपनी स्पष्ट और निष्पक्ष छवि को बनाए रख सकता है।’ रूपा का यह पहला मामला नहीं है, जब उन्होंने अपने विवेक का परिचय देते हुए साफ-सुथरा रास्ता अपनाया, बल्कि चर्चित राजनीतिज्ञ शशिकला के दो करोड़ के घूसकाण्ड को भी रूपा उजागर कर चुकी हैं।

सिस्टम के खिलाफ जाकर किए खुलासे
आय से अधिक संपत्ति के मामले में पारापन्ना अग्रहारा जेल में बंद शशिकला ने दो करोड़ की घूस दी थी। यह जेल में स्पेशल ट्रीटमेंट चाहती थीं। रूपा को जब यह पता, चला तो उन्होंने बेहद सुलझे तरीके से सारा मामला एक्सपोज किया। इस एक्सपोज में महानिदेशक जेल द्वारा वीआईपी सुविधाओं के लिए दो करोड़ की घूस लेने की पोल खुली। हालांकि डीजी खुद पर लगे आरोपों को खारिज करते रह गए।

18 साल का करियर, नेताओं में खौफ
संविधान के प्रति निष्ठा और देशहित में कर्तव्यों की पालना की शपथ डी. रूपा को हमेशा कुछ नया और कुछ बड़ा करने में मददगार रही। शार्प शूटर रूपा को 2004 में मध्यप्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती को भी गिरफ्तार कर चुकी हैं। दंगे भड़काने के आरोप में न्यायालय के आदेशों की सख्ती से पालना करवाते हुए उमा भारती को गिरफ्तार करने के मामले में रूपा खास चर्चित रह चुकी हैं। वीआईपी ट्रिटमेंट के नाम पर नेताओं की सुरक्षा में लगा पुलिस जाप्ता हटा लेने जैसे कठोर कदम उठाने के अलावा रूपा पूर्व मुख्यमंत्री येदुरप्पा के साथ चलने वाले कारों के काफिलों की संख्या भी कम कर चुकी हैं। नेताओं की सेवा में लगे गैर-जरूरी पुलिसकर्मियों और बिना परमिट चलने वाल वाहनों को हटाने के उनके आदेशों ने काडर में खलबली मचा कर रख दी थी। मैसूर के सांसद प्रताप सिंह पर पसंदीदा अफसरों की पोस्टिंग करवाने के रूपा के आरोपों ने उनकी फेसबुक पोस्ट को जमकर चर्चा में ला दिया था।

शार्प शूटर भी हैं रूपा
पुलिस रूपा की नौकरी नहीं, जिंदगी है। उन्होंने 2000 बैच में 43वीं रैंक हासिल करने के बाद हमेशा अपना कद बढ़ाया ही है। हैदराबाद में पुलिस प्रशिक्षण के दौरान बैच में पांचवा स्थान हासिल किया। शूटिंग के मामले में उन्हें शार्प शूटर का दर्जा हासिल है। कर्नाटक काडर मिला, तो काडर में कुछ ऐसा काम किया कि प्रेसिडेंट पुलिस मेडल से भी सम्मानित हुईं। ढेरों पुरस्कार ले चुकीं डी. रूपा ने सच के साथ मिलकर न्याय के लिए सब कुछ किया, लेकिन समझौता कभी नहीं किया।