मुश्किलों के बीच सपनों की उड़ान फ्लाइट ऑफ फेंटेसी

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राउंड टेबल इंडिया की महत्त्वाकांक्षी परियोजना है फ्लाइट ऑफ फेंटेसी।
अभावाग्रस्त जीवन के बीच बच्चों की जिंदगी में उम्मीद की किरण बनकर उभरी इस
योजनांतर्गत जयपुर के बच्चे घूमेंगे राष्ट्रपति भवन और करेंगे दिल्ली दर्शन।

जयपुर। संभावनाएं हालातों से प्रभावित नहीं होतीं और असंभव कुछ भी नहीं होता। फ्लाइट ऑफ फेंटेसी तो यही सिखाती है। एक ऐसी योजना जो दुनिया के कई देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुके राउंड टेबल की भारत में बड़ी पहचान बन गई है। राउंड टेबल इंडिया की ओर से यह योजना हर साल सामाजिक रूप से अभावग्रस्त बच्चों को हवाई यात्रा, रेल यात्रा, दिल्ली दर्शन और राष्ट्रपति भवन की रोमांचक सैर का तोहफा देती है।

रविवार को एक बार फिर जयपुर से दिल्ली हवाई जहाज की सैर करने लिए अनंत सपनों की उड़ान तैयार होगी। शहर के विभिन्न पांच संस्थानों से चुने हुए बच्चों और संरक्षकों के साथ राउंड टेबल का दल सवेरे जयपुर एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना होगा। 31 सदस्यीय इस दल में जयपुर के ज्ञान विद्या मंदिर, बालिका सदन स्कूल, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, संतोषनगर, उदयन केयर और उमा बाल भारती के 10 से 18 साल के बच्चे शामिल होंगे। यह बच्चे हवाई सैर का मजा तो लूटेंगे ही, राष्ट्रपति भवन की सैर भी करेंगे। इसके बाद इन्हें दिल्ली दर्शन का तोहफा भी मिलेगा, जिसमें इंडिया गेट, कुतुब मिनार सहित कई रोमांचक स्थल शामिल होंगे। यह बच्चे पहली बार हवाई यात्रा करेंगे। रात को वापसी में डबल डैकर के जरिए जीवन में पहली बार ट्रेन की सवारी भी करेंगे। एक रोमांचक सफर, सपनों की उड़ान और जिदों को जितने की चाहत के साथ शुरू होगा और यादगार लम्हों के साथ हमेशा जीवंत रहेगा

क्या है फ्लाइट ऑफ फेंटेसी

राउंड टेबल इंडिया की राष्ट्रीय परियोजना का अहम हिस्सा है फ्लाइट ऑफ फेंटेसी। इस योजना का उद्देश्य सुविधाओं से वंचित रहे छात्र-छात्राओं की जिंदगी और मन-मस्तिष्क पर भविष्य की संभावनाओं को जगाना है। अनुभव से सीखना और सिखाना है। स्कूलों में शिक्षण-प्रशिक्षण में अभावग्रस्त हालातों का सामना करते हुए जो कमियां रह जाती हैं, उन्हें पूरा करना है। अभावों में जुगर-बसर करने वाले छात्र-छात्राओं के बीच उन बड़ी संभावनाओं से रूबरू करवाना है, जिनका सपना भी उनके लिए मुश्किल है। यह साधारण उड़ान नहीं, उनके सपनो की उड़ान है। उनके लिए अजूबों की दुनिया की यादगार सैर है। ऐसी सैर जिससे वह अपने जीवन में उड्डयन उद्योग को ही नहीं, बल्कि दुनिया में उम्मीदों से बाहर देख पाएं। अजूबों की दुनिया को जी पाएं।

कुछ अलग है राउंड टेबल

राउंड टेबल इंटरनेशनल संस्थान की स्थापना 1962 में की गई थी। इसके संस्थापकों में 18-40 वर्ष के ऐसे यंग अचीवर्स शामिल थे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को कायम करते हुए सामाजिक सहभागिता और व्यक्तिगत विकास को प्राथमिकता दी। विश्व के कई देशों के साथ भारत में भी राउंड टेबल इंडिया के अंतर्गत संगठन बेहद सफल रहा। भारत में राउंड टेबल इंडिया के अंतर्गत बीते 15 सालों में 2172 स्कूलों और 5377 कक्षाओं का निर्माण करवाया गया। करीब 179 करोड़ रुपए की लागत की इन परियोजनाओं से देश के शिक्षा जगत में आधार स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ा। जिससे सीधे तौर पर 51.50 लाख सुविधाओं से वंचित छात्र-छात्राओं को लाभ मिला। वर्ष 1998 में राउंट टेबल इंडिया ने राष्ट्रीय परियोजना के तौर पर फ्रीडम थ्रू एजुकेशन का बीड़ा उठाया और समाज पर गहरा असर छोड़ा।

सपने सच करने का दूसरा नाम है फ्लाइट ऑफ फेंटेसी
फ्लाइट ऑफ फेंटेसी सामाजिक रूप से पिछड़े और सुविधाओं के वंचित बच्चों के सपनों को सच करने का लाइव अनुभव है। हम इस यात्रा के साथ फ्लाइट ऑफ फेंटेसी का आठवां साल पूरा कर रहे हैं। यह मुस्कान के साथ उम्मीदों का सफर है, जिसमें अभावों से जूझते बच्चे सपनों की सैर कर पाएंगे। राउंड टेबल फिलहाल विश्व के 67 देशों के 95 शहरों में अपने 4000 सदस्यों के साथ मुख्यधारा से पिछड़े लोगों की जिंदगी में अहम योगदान दे रहा है।

– रजत बोहरा, नेशलन सीएसआर कंवेयर, राउंड टेबल इंडिया

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