आई.पी.एस. ‘सपन’ का नया कहानी संग्रह ‘आदि अनंत’

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विशाखापट्टनम। वरिष्ठ आई.पी.एस., लेखक और कवि विश्वजीत सपन का बहुप्रतिक्षित कहानी संग्रह ‘आदि अनंत’ आ गया है। विशाखापट्टनम के ही राइटर्स एण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के तत्त्वावधान में हिन्दी भवन, आन्ध्र विश्वविद्यालय, विशाखापट्टनम में आयोजित एक समारोह में इस कहानी संग्रह का लोकार्पण किया गया।

कहानी संग्रह ‘आदि अनंत’ का लोकार्पण हिन्दी एवं तेलगु के विद्वान पद्म विभूषण वाई. लक्ष्मी प्रसाद, साहित्यकार अनुपमा त्रिपाठी, वाजा के अध्यक्ष डॉ. एस. कृष्ण बाबू, हिन्दी आलोचक डॉ. एम. वेंकटेश्वर, हिन्दी के जाने-माने व्यक्तित्व ज्योति नारायण दिनकर एवं डॉ. राजेश्वर ने किया। सैंकड़ों साहित्य प्रेमियों के समक्ष हुए इस लोकार्पण समारोह में हिन्दी के शोधार्थी भी बड़ी संख्या में मौजूद थे। इस अवसर पर लोकार्पित कहानी संग्रह आदि अनंत पर चर्चा की गई, जिसके साथ ही साथ हिन्दी की दशा-दिशा एवं उसके महत्त्व पर भी चर्चा हुई। कहानी संग्रह आदि अनंत का आमुख प्रसिद्ध एवं वरिष्ठ साहित्यकार आनंद वर्धन ओझा द्वारा लिखित है। ओझा के अनुसार सपन की पन्द्रह कहानियों का अनूठा संग्रह है आदि अनंत। लेखक की ये कहानियां किसी स्वप्न जगत से नहीं उपजतीं बल्कि जीवन और जगत के खट्टे-मीठे अनुभवों से आकार पाती हैं। प्रवाहमयी भाषा में लिखी गई इन कहानियों में आज के युग का सत्य मुखरित हुआ है, जिसका केन्द्रीय पात्र मूलत: मनुष्य है। मनुष्य के मन:लोक की जटिलताएं, कुण्ठाएं, व्यग्रता, विवशता, संत्रास और समस्याएं इन कहानियों में मूर्त हुई हैं।
लोकार्पित पुस्तक : आदि अनंत
प्रकाशक : नेशनल पब्लिशिंग हाउस, दरियागंज, नई दिल्ली
ऑनलाइन उपलब्ध : अमेजन

आदि अनंत मेरा दूसरा कहानी संग्रह है, जिसमें 15 कहानियां शामिल हैं। हिन्दीतर क्षेत्र में हिन्दी के प्रति इतना उत्साह मैंने पहली बार देखा और निर्णय उचित लगा कि इस जगह पर लोकार्पण का कार्यक्रम किया गया।

– विश्वजीत सपन, आई.पी.एस.

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