ट्रंप का इक्का स्टिफन मिलर, आप इन्हें जानना चाहेंगे!

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अमेरिका। डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनते ही चुनिंदा इस्लामिक देशों के  बैन पर भले ही दुनिया में एक खेमा भडक़ा। ट्रम्प की भर्तस्ना की गई। बड़े वर्ग द्वारा तारीफ भी की गई। लेकिन आखिर इस बड़े कदम के पीछे कौन जानना हर कोई चाहता था। मात्र 31 साल के स्टिफन मिलर के दिमाग ने दुनियाभर को इस कदम से हिला डाला। ट्रम्प के वरिष्ठ सलाहकार स्टिफन की ही सलाह पर इस्लामिक देशों को बैन किया गया।

इस्लामिक विचारधार के विरोध में बचपन से ही रहे मिलर ने अपने स्कूल समाचार पत्र में लिखा है, हम शांतिपूर्वक जीवन को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन हम इसाइयों और अमरीकन की मौत का जश्न दुनियाभर में करोड़ों मुस्लिम मनाते हैं। इस तथ्य को बदला नहीं जा सकता। मिलर के इस लेखन की पुष्टि करने वाले एक वरिष्ठ अधिवक्ता के अनुसार मिलर शुरू से ही इस्लाम विरोधी रहे हैं। जानकारों के मुताबिक मिलर ने ड्यूक युनिवर्सिटी से राजनीति विषय में अध्ययन करने के बाद विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेखन से भी जुड़े। मिलर को सबसे पहले पहचान तब मिली जब उन्होंने बलात्कार के झूठे आरोपों से घिरे तीन गोरों के समर्थन में आवाज बुलंद की। अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद मिलर ने माइकल बैचमैन के लिए काम किया, जिन्होंने ट्रम्प को राजनीतिक रूप से आगे बढऩे में बड़ा सहयोग किया था। मिलर ने ट्रम्प के चुनावी दौर में उनकी स्पीच लिखने सहित कई अहम पक्षों को संभाला। जिसके तोहफे के तौर पर ट्रम्प ने राष्ट्रपति बनते ही मिलर को सीनियर पॉलिसी एड्वाइजर का पद सौंप दिया।

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