जयपुर। राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत के मुख्य सचिव पद छोड़ने और आज अल सुबह उनके दिल्ली डेप्यूटेशन के आदेश ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया। एक ओर जहां दीपावली के पहले से ही आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची का इंतजार सभी कर रहे थे, वहीं उसमें होती देरी और मुख्यमंत्री कार्यालय में एक दिन पहले कुछ बड़ा होने का अंदेशा जताते हुए मुख्य सचिव सुधांश पंत की एक साइलेंट चेतावनी ने आज राजस्थान की सत्त और गलियारों में सबसे बड़ा मुद्दा सुबह-सवेरे छोड़ दिया।
1991 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुधांश पंत अब नई दिल्ली में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में सचिव के पदभार संभालेंगे। यह नियुक्ति अमित यादव के 30 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्ति के बाद प्रभावी होगी, और पंत 1 दिसंबर से अपना नया दायित्व निभाना शुरू करेंगे।
पंत का दिल्ली जाना सियासी फेरबदल का पहला संकेत
उपचुनाव के बाद राज्य मंत्रीमण्डल में बडेÞ फेरबदल की खबरे बीते तीन सप्ताह से हैं। एक पक्ष यह भी मान रहा है कि मंत्रीमण्डल में इस्तीफे दीपावली के पहले ही लिए जा चुके हैं, लेकिन अभी उपचुनाव के चलते बात दबाई हुई है। मुख्य सचिव के दिल्ली जाने के पीछे मजबूत कारणों में फाइल्स के मूवमेंट में मुख्य सचिव को नजरअंदाज करना भी एक अहम कारण माना जा रहा है। दो वर्ष पूर्व 6 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की सीनियरटी लांघ कर मुख्य सचिव बने सुधांश पंत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गुड बुक्स के अधिकारियों में हैं। पंत का योजनाओं को अमलीजामा पहनाने का तरीका और एग्जीक्यूशन से इम्पैक्ट तक का प्रभावशाली होना खास माना जाता रहा है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की दखलअंदाजी भी बना कारण
गलियारों में दिनभर चली चर्चाओं में सुधांश पंत और अन्य अधिकारियों को स्वतंत्र निर्णय लेने में समस्याएं, लगातार बढ़ती राजनीतिक दखलअंदाजी और सीएमओ का मुख्य सचिव पर लगातार हावी होना इस आॅर्डर का बेस बताया जा रहा है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के मुताबिक ज्यादातर विभागों में में मंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय से ऐसे कामों के दबाव बनाने के प्रयास किए जाते रहे, जिनमें प्रशासनिक समस्याएं लगातार पैदा हो रही थी। मंत्रीमण्डल और मुख्यमंत्री का योजनाओं को अमलीजामा पहनाने या विरोधाभासी आदेशों की पालना करवाने जैसे फैसले अफसरों के लिए तो समस्या बन ही रहे थे, मुख्य सचिव के लिए भी तनाव का कारण बन रहे थे।

ब्यूरोक्रेसी और राजनीति में तालमेल बिगड़ा
ब्यूरोके्रसी का एक बड़ा हिस्सा दबी जबान यह भी चर्चा कर रहा है कि राजनीतिक और प्रशासनिक तालमेल में मुख्य सचिव को पद छोड़ना पड़ गया है। इस बडेÞ फैसले से ताजा हालातों में राजनीतिक और प्रशासनिक हलके अब दो फाड़ हो गए हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में होने वाले एग्जीक्यूशंस, आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची, सचिवालय की मीटिंग्स और कामकाज में सीधे तौर पर देखने को मिलेगा। एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस तरह के फैसले प्रदेश के पहले से चल रही लचर व्यवस्था में आग में घी का काम करेंगे। मुख्य सचिव तो दिल्ली चले जाएंगे, लेकिन पीछे से ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक के बीच तालमेल बिठाने में खासा समय लग जाएगा।
बहरहाल माना जा रहा है कि मुख्य सचिव सुधांश पंत प्रतिनियुक्ति पर केन्द्र में जाकर भी राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के बीच अहम सेतु की भूमिका में रहेंगे। पंत मुख्य सचिव बनने के बाद से ही बेहद सक्रिय थे। डिपार्टमेंटल ई फाइल्स का मूवमेंट, औचक निरीक्षण, तबादला सूचियों बदलाव सरीखे कई मसलों पर उनका अपना मजबूत स्टैड देखने को मिला। पंत पूरे कार्यकाल में फरफोर्मेंस बेस्ड मॉडल को बढ़ावा देने को लेकर जुटे रहे।

