IAS Dr Jitendra Kumar Soni को देश के प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है। उन्हें यह सम्मान वर्ष 2025 के लिए राजस्थानी भाषा में उनकी चर्चित कहानी संग्रह ‘भरखमा’ के लिए प्रदान किया जाएगा।
यह पुरस्कार देश की 24 मान्यता प्राप्त भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों के लिए दिया जाता है और इसे भारतीय साहित्य का सर्वोच्च संस्थागत सम्मान माना जाता है। पुरस्कार के अंतर्गत एक लाख रुपये की राशि, प्रशस्ति-पत्र एवं प्रतीक-चिह्न प्रदान किया जाता है।
प्रशासन और साहित्य का अनूठा संगम
वर्तमान में जयपुर के जिला कलेक्टर के रूप में कार्यरत डॉ. सोनी एक कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ संवेदनशील साहित्यकार भी हैं। प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच उन्होंने साहित्य सृजन की निरंतर साधना जारी रखी है।
राजस्थानी और हिन्दी दोनों भाषाओं में सक्रिय डॉ. सोनी की अब तक 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन, मानवीय संवेदनाएं और सामाजिक यथार्थ का प्रभावी चित्रण देखने को मिलता है।
‘भरखमा’ ने दिलाई राष्ट्रीय पहचान
पुरस्कार के लिए चयनित कहानी संग्रह ‘भरखमा’ राजस्थानी साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है। इस संग्रह की कहानियाँ ग्रामीण परिवेश, रिश्तों की जटिलता और जीवन संघर्ष को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान
डॉ. सोनी को इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। उनकी राजस्थानी कविता संग्रह ‘रणखार’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी का युवा पुरस्कार भी मिल चुका है। इसके अलावा हिंदी और राजस्थानी साहित्य में उनके योगदान को विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है।
साहित्य जगत में खुशी की लहर
साहित्य अकादमी पुरस्कार की घोषणा के बाद राजस्थान सहित पूरे साहित्य जगत में खुशी का माहौल है। साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे राज्य और राजस्थानी भाषा के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।

